आचार्य संतोष

पटना | 2 मार्च 2026

3 मार्च 2026 को आकाश में घटित होने वाला खग्रास चन्द्र ग्रहण केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि प्रकृति और चेतना के मध्य अद्भुत संवाद का क्षण है। यह वर्ष 2026 का प्रथम पूर्ण चन्द्र ग्रहण है, जिसका परिमाण लगभग 1.14 रहेगा। समग्रता के समय चन्द्रमा पूर्णतः पृथ्वी की प्रच्छाया में प्रवेश करेगा और पृथ्वी के वायुमंडल से अपवर्तित सूर्य किरणों के कारण वह रक्तिम आभा से आलोकित दिखाई देगा। इसी कारण इसे सामान्यतः ‘ब्लड मून’ कहा जाता है।

यह दृश्य हमें स्मरण कराता है कि ब्रह्मांड की प्रत्येक गति एक निश्चित नियम के अधीन है। विज्ञान इसे खगोलीय गणित कहता है, जबकि शास्त्र इसे दैवीय व्यवस्था का संकेत मानते हैं।

ग्रहण का समय

पटना में चन्द्र ग्रहण चन्द्रोदय के साथ सायं 5:55 बजे प्रारंभ होगा और 6:46 बजे समाप्त होगा। स्थानीय स्तर पर ग्रहण की दृश्य अवधि लगभग 51 मिनट 50 सेकण्ड रहेगी।

ग्रहण के प्रमुख चरण इस प्रकार रहेंगे-

  • उपच्छाया का प्रथम स्पर्श – दोपहर 2:16 बजे
  • प्रच्छाया का आरंभ – 3:21 बजे
  • खग्रास प्रारंभ – 4:35 बजे
  • परमग्रास – 5:04 बजे
  • खग्रास समाप्ति – 5:33 बजे
  • प्रच्छाया समाप्ति – 6:46 बजे
  • उपच्छाया का अंतिम स्पर्श – 7:52 बजे

समग्रता की अवधि लगभग 57 मिनट 27 सेकण्ड की रहेगी, जबकि सम्पूर्ण खण्डग्रास अवधि 3 घंटे 25 मिनट 17 सेकण्ड तक चलेगी।

भारत और विश्व में दृश्यता

यह पूर्ण चन्द्र ग्रहण पूर्वी एशिया, दक्षिण-पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर क्षेत्र, उत्तर अमेरिका के अधिकांश भागों तथा दक्षिण अमेरिका के उत्तरी हिस्सों में पूर्ण रूप से दृष्टिगोचर होगा।

भारत में इसकी दृश्यता क्षेत्रानुसार भिन्न रहेगी। पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में पूर्ण ग्रहण दिखाई देगा, जबकि मध्य और उत्तरी भागों में आंशिक अवस्था स्पष्ट होगी। पश्चिमी भारत में मुख्यतः प्रच्छाया चरण ही दिखाई देगा।

देश के प्रमुख नगरों जैसे New Delhi, Mumbai, Kolkata, Chennai, Bengaluru और Hyderabad में यह विभिन्न चरणों में देखा जा सकेगा।

विश्व के प्रमुख शहरों जैसे New York City, Toronto, Sydney, Los Angeles और Tokyo में पूर्ण चन्द्र ग्रहण का मनोहारी दृश्य उपलब्ध होगा।

धार्मिक और शास्त्रीय महत्व

हिन्दू धर्म में चन्द्र ग्रहण को केवल आकाशीय घटना नहीं माना जाता, बल्कि यह साधना और आत्मचिंतन का काल माना गया है। शास्त्रों के अनुसार सूतक काल ग्रहण प्रारंभ होने से लगभग 9 घंटे पूर्व आरंभ हो जाता है। इस आधार पर 3 मार्च की प्रातः लगभग 6:20 बजे से सूतक प्रभावी रहेगा।

सूतक काल में-

  • पूजा-पाठ और हवन स्थगित रखे जाते हैं
  • मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं
  • विवाह, नामकरण, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं
  • भोजन पकाने से परहेज किया जाता है

ग्रहण समाप्ति के पश्चात स्नान, दान और जप का विशेष महत्व बताया गया है।

धार्मिक मान्यता यह भी कहती है कि वही ग्रहण धार्मिक दृष्टि से मान्य होता है जो नग्न नेत्रों से स्पष्ट दिखाई दे। केवल उपच्छाया ग्रहण को कर्मकाण्डीय दृष्टि से मान्यता नहीं दी जाती।

होली और ग्रहण का संयोग

इस वर्ष विशेष संयोग यह है कि 3 मार्च 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा के दिन ही यह चन्द्र ग्रहण पड़ रहा है। फाल्गुन पूर्णिमा को परंपरागत रूप से होलिका दहन होता है और अगले दिन रंगोत्सव मनाया जाता है।

ज्योतिषाचार्यों का मत है कि ग्रहण और सूतक के कारण 3 मार्च को रंग खेलना शास्त्रसम्मत नहीं माना जाएगा। अतः रंगों की होली 4 मार्च 2026 को मनाना अधिक शुभ रहेगा।

होली आनंद, उत्साह और सामाजिक एकता का प्रतीक है, जबकि ग्रहण आत्मसंयम और साधना का काल है। इस प्रकार यह संयोग हमें संतुलन का संदेश देता है-एक ओर उत्सव, दूसरी ओर आत्मचिंतन।

ज्योतिषीय दृष्टिकोण

ग्रहण काल को आध्यात्मिक उन्नति का अवसर माना गया है। इस समय-

  • मंत्र जाप
  • ध्यान
  • आत्मविश्लेषण
  • सकारात्मक संकल्प

विशेष फलदायी माने गए हैं।

आचार्य संतोष जी के अनुसार, ग्रहण का उद्देश्य भय उत्पन्न करना नहीं, बल्कि जीवन में अनुशासन और आत्मचेतना को जाग्रत करना है। प्रकृति जब अपने नियमों के माध्यम से परिवर्तन का संकेत देती है, तब मनुष्य को भी अपने भीतर झांकने का अवसर मिलता है।

57 मिनट से अधिक की समग्रता वाला यह खग्रास चन्द्र ग्रहण वर्ष 2026 की प्रमुख खगोलीय घटनाओं में स्थान रखता है। विज्ञान इसे पृथ्वी, सूर्य और चन्द्रमा की ज्यामितीय स्थिति का परिणाम बताता है, जबकि धर्म इसे आत्मशुद्धि और साधना का अवसर मानता है।

लालिमा से आच्छादित चन्द्रमा का यह दृश्य खगोल प्रेमियों के लिए अध्ययन का विषय होगा और श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभूति का क्षण।

आकाश में घटित यह दृश्य हमें स्मरण कराता है-
प्रकृति का प्रत्येक परिवर्तन, जीवन में संतुलन और सजगता का संदेश लेकर आता है।

– आचार्य संतोष
(ज्योतिष विशारद एवं वास्तु आचार्य)
(वेदांत साधक एवं भारतीय संस्कृति के प्रचारक)
वास्तु शुद्धि और जन्म कुंडली जागरण के लिए
संपर्क संख्या : +91 9934324365 (WhatsApp)

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